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पैसा और सेहत-कौन ज़्यादा ज़रूरी?
कहते हैं “पैसा आए तो सेहत का ध्यान रखो”, लेकिन सच्चाई ये है कि सेहत सही होगी तभी पैसा आएगा। आज की भागदौड़ में किसी के पास अपने शरीर की परवाह करने का वक़्त नहीं। एक आम आदमी सुबह 9 से शाम 4 बजे तक ऑफिस में रहता है। अब इलाज करवाने का समय कहाँ से निकाले? WHO के अनुसार, भारत में हर 3 में से 1 व्यक्ति काम के तनाव के कारण मानसिक या शारीरिक बीमारी से जूझ रहा है। छुट्टी लेकर अस्पताल जाए तो लाइनें, भीड़भाड़, और असुविधा। इलाज की गारंटी नहीं, पर बीमारी फैलने का खतरा ज़रूर। ऊपर से खर्च – जो अक्सर जेब से ज़्यादा निकल जाता है।
कुपोषण और गरीबी का अंतहीन चक्र
सरकारें भले मुफ्त इलाज और दवाइयों की बात करें, लेकिन ग्राउंड रियलिटी अलग है। एक गरीब आदमी की सबसे बड़ी समस्या है कुपोषण (Malnutrition), जो सही पोषण न मिलने से होता है। कुपोषण से होती हैं सैकड़ों बीमारियाँ -और पोषण आता है पैसे से। अब पैसा कमाने के लिए चाहिए सेहत। यानी यह एक ऐसा vicious cycle है, जिससे गरीब आदमी कभी बाहर नहीं निकल पाता। “गरीबी से बड़ी बीमारी है – ज्ञान की कमी।” जब तक शरीर मजबूत नहीं, सपने बोझ लगते हैं।
सभी वर्गों की एक ही कहानी – “समय नहीं है”
क्या सेहत की चिंता न करने की समस्या सिर्फ गरीबों की है? नहीं। मिडिल क्लास आदमी अपने सपनों की दौड़ में अपनी सेहत को “फिजूल खर्च” मान बैठा है। अमीरों के पास पैसा है, लेकिन वक़्त नहीं। किसी को 1 रोटी से 2 रोटी कमानी है, किसी को बाइक से कार लेनी है, और किसी को लाखों से करोड़ों की कमाई तक पहुँचना है। “समय और सेहत – दो चीजें हैं जो खोने के बाद ही उनकी कीमत समझ आती है।”
आधुनिक खानपान और बीमारियों का साया
गरीब को जहां संक्रामक बीमारियाँ जैसे टीबी, मलेरिया, या दूषित भोजन से होने वाली बीमारियाँ मारती हैं, वहीं मध्यम और उच्च वर्ग को घेरे हुए हैं Non-Communicable Diseases (NCDs) -पिज़्ज़ा, बर्गर, और जंक फूड से बढ़ता मोटापा, जो आज हर घर की आम कहानी है। पहले मोटापा स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता था, पर अब यही मोटापा बन चुका है बीमारियों की जननी। भारत में हर 5 में से 1 वयस्क व्यक्ति मोटापे या प्रीडायबिटीज से पीड़ित है। (ICMR 2024 Report) डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड और कैंसर जैसी बीमारियाँ अब हर गली-मोहल्ले में आम हो चुकी हैं। क्या कोई ऐसा घर है जहाँ कोई शुगर का मरीज न हो? शायद नहीं। और फिर आता है हाईपरटेंशन – जिसकी जड़ें हैं स्मोकिंग, तंबाकू, तनाव और नमक की लत। WHO के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 25 लाख लोग हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी जटिलताओं के कारण मरते हैं।
वो बीमारी’ जिससे हर कोई डरता है – कैंसर
“कैंसर” – एक ऐसा शब्द, जिसे सुनते ही सन्नाटा छा जाता है। लोगों को मौत का डर गोली से नहीं, बल्कि कैंसर के नाम से लगता है। और सही भी है – क्योंकि गोली एक पल में मार देती है, पर कैंसर धीरे-धीरे इंसान और उसके परिवार दोनों को निगल जाता है। “Cancer doesn’t just kill bodies; it kills courage, hope, and smiles.” “मौत से नहीं, दर्द से डर लगता है – और कैंसर यही देता है।”
समाधान है – बस नज़रिया बदलने की ज़रूरत है
इतनी सारी समस्याओं के बीच समाधान भी है। क्या बड़े-बड़े अस्पताल ही इसका हल हैं? बिलकुल नहीं। कभी-कभी हल बहुत सरल और सुलभ होता है – बस हमें पता नहीं होता। क्या खाएं, कितना खाएं, कब खाएं, और अगर बीमारी हो भी तो कैसे उसका सही इलाज करवाएं – अब ये सब घर बैठे मुमकिन है, वो भी बिना ज़्यादा खर्च किए। “सेहत का मतलब सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि बीमारी से पहले की सुरक्षा है।”
Callyourdoctor.in – सेहत की एक नई सोच
इसी सोच से जन्मी है एक पहल – Callyourdoctor.in, जिसे AIIMS, PGI Chandigarh और Safdarjung Hospital के डॉक्टरों ने मिलकर शुरू किया है। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति को मिले – घर बैठे इलाज और बीमारी से पहले बचाव की सुविधा। यहाँ मरीज़ को पूरा समय दिया जाता है, ध्यान से सुना जाता है, और बार-बार फॉलोअप व फीडबैक कॉल्स के ज़रिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि आप अकेले नहीं हैं। “यहाँ इलाज इंसानियत से होता है, न कि पैसे से।”
क्यों Callyourdoctor.in है अलग?
ऑफिस से लौटने के बाद भी कर सकें इलाज, माँ रात के अंधेरे में अपने बच्चे के लिए डॉक्टर से जुड़ सके, गर्भवती महिलाएँ घर बैठे अपनी रिपोर्ट्स व सलाह पा सकें, ओवरवेट लोग पा सकें हेल्दी वेट लॉस गाइडेंस, बच्चों को मिले सही पोषण और विकास की सलाह, हर उम्र के लोगों को समय पर वैक्सीन लगवाने की सुविधा। “टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तभी मायने रखता है, जब वो ज़िंदगी को आसान बनाए ,मुश्किल नहीं।”
देश के निर्माण की एक स्वस्थ पहल
कुछ पहलें सिर्फ जीवन नहीं बदलतीं, वे देश के निर्माण की दिशा तय करती हैं। Callyourdoctor.in ऐसी ही एक पहल है – जहाँ इलाज ‘इंसानियत’ से किया जाता है, ‘कमाई’ से नहीं। तो जुड़िए इस पहल से, और रखिए अपनी सेहत का 100% ख्याल।
“अपने शरीर का ख्याल रखें, यही वो जगह है जहाँ आपको पूरी ज़िंदगी रहना है।”
“वक़्त से पहले कोई नहीं जाएगा – कोई नहीं मतलब कोई नहीं।”


It’s true